शिक्षिका ने घर से निकले वेस्ट, पुराने बर्तनों व प्लास्टिक के डिब्बों का प्रयोग कर घर की छत को किया गार्डन में तब्दील

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बागवानी घर की सुंदरता को तो बढ़ाती ही है साथ ही मानसिक तनाव को भी दूर करती है परंतु इसके लिए थोड़ी-सी मेहनत भी चाहिए। आजकल ज़्यादा जगह न होने के कारण घर की छत पर गार्डन बनाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि इससे कम जगह की समस्या का समाधान भी हो जाता है और बागवानी के शौक को पूरा भी कर सकते हैं। ऐसी ही एक कहानी है पेड़ पौधे और बागवानी से अत्यधिक लगाव रखने वाली गुरुग्राम (Gurugram) की निवासी अनामिका (Anamika) की जिन्होंने अपने घर की छत को सुंदर गार्डन में बदल दिया।

प्राइवेट स्कूल की है शिक्षिका

अनामिका दिल्ली के फाइनेंशियल और टेक्नोलॉजी हब कहे जाने वाले शहर गुरुग्राम की रहने वाली है और पेशे से एक प्राइवेट स्कूल की शिक्षिका है। बागवानी का शौक उन्हें बचपन से था और गुरुग्राम में अपने घर में उन्होंने अपने शौक को पूरा किया।

मेहनत रंग लाई

शुरुआती दौर में अनामिका को अनुभव ना होने के कारण थोड़ी निराशा हुई। उन्होंने घर के पुराने बर्तन बाल्टी प्लास्टिक के डिब्बे आदि में लगभग 25 पौधे लगाए जिनमें चंपा, नींबू, गुलाब आदि शामिल थे। उनमें से ज्यादातर पौधे सूख गये परंतु उन्होंने हिम्मत नहीं हारी यूट्यूब से टेरेस गार्डनिंग की वीडियो देखकर उन्होंने जानकारी प्राप्त की।

महत्त्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर से नए पौधे लगाए। यूट्यूब से उन्हें मिट्टी की उपयुक्तता और अनुपयुक्तता के बारे में जानकारी मिली तो उन्हें पता चला कि उनके आसपास की मिट्टी पौधों के लिए उपयुक्त नहीं है इसलिए शुरुआत में पौधे सूख गये थे।

इसके बाद उन्होंने बाज़ार से प्रचलित वर्मी कंपोस्ट खरीद इसे मिट्टी में मिलाया, इसके साथ ही किचन से निकले वेस्ट का प्रयोग किया जो पौधों के लिए खाद का काम करता है। परिणामस्वरूप मिट्टी की उर्वरता बढ़ी। इसके बाद उन्होंने अपनी गार्डन में धीरे-धीरे की पौधो की संख्या बढ़ायी। उनकी मेहनत रंग लाई और आज अनामिका के बगीचे में 150 से अधिक पौधे हैं। उनका गार्डन 37X 9 का है।

करती है Organic खेती

आजकल जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है क्योंकि इनमें केमिकल्स का प्रयोग नहीं किया जाता। जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियों की मांग भी काफ़ी है। अनामिका बताती हैं कि उन्होंने अपने घर में जैविक खेती के माध्यम से कई सब्जियाँ व फल जैसे-लौकी, खरबूजा, करेला, कद्दू आदि लगाए हैं। उनके टैरेस गार्डन में अनार, नींबू, आम, लेमन ग्रास, इमली जैसे कई उपयोगी पौधे भी है।

घर पर ही करती हैं ग्राफ्टिंग

अनामिका घर पर ही नींबू, गुलाब, शहतूत आदि पौधों की ग्राफ्टिंग कर एक पौधों से कई नये पौधे बनाती हैं। गमले के अलावा उन्होंने अपने गार्डन में पुराने बर्तनों, डिब्बों से लेकर जीन्स का प्रयोग बड़ी ही खूबसूरती से किया है। वह कहती हैं कि उन्हें अपने बगीचे में बैठना पसंद है जिससे मन को शांति मिलती है और गार्डनिंग से तनाव में मुक्ति मिलती है।

अनामिका के बागवानी के लिए ज़रूरी टिप्स:

  1. मिट्टी का चुनाव सावधानी से करें। मिट्टी और खाद को-को 60: 40 के अनुपात में मिलाकर गमले में डालें।
  2. अगर आप बागबानी की शुरुआत कर रहे हैं तो शुरुआत गुलाब, चंपा, नींबू आदि जैसे आसानी से लगने वाले पौधों से करें।
  3. पौधों के लिए 4-5 घंटे की धूप आवश्यक है।
  4. शुरुआत के लिए जनवरी से मार्च का महीना ठीक है क्योंकि इस समय पौधे सूखते नहीं है।
  5. पहली बार में अगर सफल ना हो तो निराश ना हो बल्कि धैर्य रखें क्योंकि बागवानी समय लेती है।

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