बड़े महंगे हैं कंप्यूटर बाबा के शौक, लैपटॉप से राजनीति तक विवादों से रहा है गहरा नाता

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एमपी उपचुनाव के बाद एक बार फिर से कंप्यूटर बाबा का नाम खासा सुर्खियों में छाया हुआ है, जहां एक और शिवराज सरकार ने अवैध जमीन कब्जे के मामले में कार्रवाई करते हुए कंप्यूटर बाबा के आश्रम को तोड़ दिया है तो वही कांग्रेस ने इसे शिवराज सरकार की बदले की कार्रवाई करार दिया है। दरअसल पहले बीजेपी के मंत्री पद पर रह चुके कंप्यूटर बाबा ने उपचुनावों के दौरान बीजेपी का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। ऐसे में कंप्यूटर बाबा के आश्रम पर हुई इस कार्रवाई को इसी मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है।

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मध्यप्रदेश के इंदौर में कंप्यूटर बाबा के आश्रम पर अवैध कब्जे के तहत हुई कार्रवाई के बाद कंप्यूटर बाबा का नाम सुर्खियों में छा गया है। वही बाबा के गोमटगिरी आश्रम पर प्रशासन के चले बुलडोजर के दौरान जब बाबा और आश्रम के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई तो पुलिस ने बाबा सहित 14 लोगों को हिरासत में ले लिया। ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि आखिर कौन है कंप्यूटर बाबा और कैसे लैपटॉप और हवाई जहाजों के शौक रखने वाले बाबा ने राजनीति का रुख किया…

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कंप्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है। कंप्यूटर बाबा को लेकर उनके साथ रहने वाले महंत नृसिंह दास महाराज का कहना है कि वह बेहद तेज दिमाग और स्मार्ट वर्किंग कार्यशैली के हैं। यही कारण है कि दुनिया भर में आज उन्हें कंप्यूटर बाबा के नाम से जाना जाता है।

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गौरतलब है कि साल 1998 के दौरान दुनिया भर में कंप्यूटर खासा चर्चा का विषय रहा और बदलती दुनिया और बदलती क्रांति में कंप्यूटर का नाम शामिल होने लगा, तो बाबा के तेज दिमाग की तुलना आश्राम में कंप्यूटर से की जाने लगी। ऐसे में एक कार्यक्रम के दौरान साधु संतों ने नामदेव दास महाराज की कार्यशैली को देखते हुए उनका नाम कंप्यूटर बाबा रख दिया।

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इतना ही नहीं बाबा को कंप्यूटर लैपटॉप के अलावा हेलीकॉप्टर के भी बेहद शौक है। बाबा का हेलीकॉप्टर प्रेम उस समय चर्चाओं में आया था, जब यज्ञ और अनुष्ठानों के पर्चे बांटने के लिए बाबा ने हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया था। दरअसल साल 2011 के मालवा महाकुंभ और साल 2012 के विदिशा में धार्मिक आयोजन के प्रचार प्रसार के लिए बाबा ने हेलीकॉप्टर के जरिए ही पर्चे बांटे थे।

इसके बाद साल 2014 में बाबा ने पहली बार राजनीति में कदम रखा। साल 2014 में बाबा ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर संसद पहुंचने का सपना देखा, हालांकि कुछ कारणों के चलते यह सपना पूरा नहीं हो सका।

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इसके बाद दिगंबर अखाड़ा से जुड़े श्री-श्री 108 महामंडलेश्वर नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा का इंदौर के अहिल्या आश्रम में भव्य स्वागत हुआ। इस दौरान बाबा ने कहा था कि वह धर्म और आस्था में विश्वास रखते हैं, लेकिन अंधविश्वास पर बिल्कुल भरोसा नहीं करते। बाबा की यह सोच उस दौरान काफी चर्चा का केन्द्र रही थी।

हाल फिलहाल के दिनों में कंप्यूटर बाबा का नाम एक बार फिर चर्चा में आया है। शिवराज सरकार के दौरान भी कंप्यूटर बाबा ने नर्मदा घोटाला रथयात्रा निकाली थी। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कंप्यूटर बाबा समेत पांच साधु-संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। हालांकि 2018 के चुनाव से पहले ही कंप्यूटर बाबा का शिवराज सरकार से मोहभंग हो गया था और उन्होंने बीजेपी का दामन छोड़ दिया था।

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इसके बाद उन्होंने शिवराज सरकार के विरोध में लोकतंत्र बचाओ यात्रा निकाली थी। वहीं हाल ही में उप चुनावों के दौरान उन्होंने कांग्रेस का साथ थामा था और कांग्रेस के लिए प्रचार-प्रसार भी किया था। मालूम हो कि बीते चुनावों के दौरान जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी। उस दौरान कंप्यूटर बाबा को तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने नर्मदा-क्षीया मंदिर का अध्यक्ष बनाया था।

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