आइये जाने: छोटी-मोटी बीमारियों से लगाकर कैंसर तक, इन 2 मंदिरों में कदम रखते ही गायब

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दोस्तों आदि अनादि काल से जो हमारे देश में देवी देवताओ को पूजा जाता है,इसे कई अधर्मी लोग फर्जी और मनघडन,और पाखण्डवाद मानते है मगर भारत वर्ष में कई मंदिर ऐसे है जहाँ ये लोग कुछ नहीं बोल सकते क्यों की ये देवीय शक्ति वाला स्थान किसी के ना मानने में नहीं आता क्यों के यहाँ पर जो कोई भी व्यक्ति अपनी परेशानी,बीमारी लेकर के आता है तो उसका निवारण अवशय होता है और कई अधर्मी,नास्तिक लोगो को दंडवत प्रणाम करते हुवे देखा जा सकता है,आप भी जानिए ऐसे शक्तिशाली स्थान के बारे में

1.हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर दंदरौआ धाम

हनुमान जी के देशभर में कई चमत्कारी मंदिर हैं। उन्हीं चमत्कारी मंदिरों में से एक ऐसा मंदिर भी है जहां का चमत्कार जानकर आपको हैरानी होगी लेकिन यह बिलकुल सत्य है की मध्यप्रदेश के भिंड में जिले में हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर दंदरौआ धाम है। यहां मंदिर में हनुमान डॉक्‍टर के रूप में पूजे जाते हैं। मान्यताएं है कि इस मंदिर के हनुमान स्वयं अपने एक भक्त का इलाज करने डॉक्टर बनकर पहुंचे थे।

मान्यता है कि एक साधु शिवकुमार दास को कैंसर था। उसे हनुमान जी ने मंदिर में डॉक्टर के वेश में दर्शन दिए थे। वे गर्दन में आला डाले थे, जिसके बाद साधु पूरी तरह स्वस्थ हो गया। आज इस मंदिर में प्रदेश नहीं बल्कि देशभर से लोग अपनी गंभीर बिमारियों का इलाज करवाने आते हैं और कई लोगों को बीमारियों से छुटकारा भी मिलता है | मंदिर में विशेष रूप से फोड़ा, अल्सर और कैंसर जैसी बीमारियां भी मंदिर की पांच परिक्रमा करने पर ठीक हो जाती हैं। यहां डॉक्टर हनुमान के पास अच्छी सेहत की उम्मीद लेकर लाखों श्रद्धालु जुटते है।

2.चतुरदास जी महाराज मंदिर

राजस्थान के नागौर से चालीस किलोमीटर दूर अजमेर-नागौर रोड पर कुचेरा कस्बे के पास बुटाटी धाम है। जिसे चतुरदास जी महाराज के मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां हर साल हजारों लोग लकवे के रोग से ठीक होकर जाते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां मरीजों के लिए इलाज के लिए किसी भी प्रकार के कोई डॉक्टर, हकीम या वैद्य नहीं हैं। बल्कि लकवा के इलाज के लिए यहां की चमत्कारी शक्तियों का प्रयोग किया जाता है। कहा जाता है कि करीब 500 वर्ष पूर्व चतुरदास जी जोकि सिद्ध योगी थे वे अपनी तपस्या से लोगों को रोग मुक्त करते थे। आज भी उनकी समाधी पर परिक्रमा करने से लकवे से पीड़ित लोगों को राहत मिलती है। यहां नागौर के अलावा पूरे देशभर से लोग आते हैं। हर साल वैशाख, भादवा और माघ महीने में मेला लगता है। लकवा के सफल इलाज के लिए यहां मरीज को लगातार 7 दिन तक मंदिर की परिक्रमा लगानी पड़ती है। परिक्रमा पूरी करने के बाद मरीज को एक हवन में हिस्सा लेना होता है। हवन समाप्त होने के बाद कुंड की विभूति मरीज को लगाई जाती है। जिसके बाद उसके सभी रोग खुद-ब-खुद दूर हो जाते हैं। ये पूरी प्रक्रिया किसी चमत्कार से कम नहीं है।

सबसे पहले तो मरीज की बीमारी खत्म होती है और फिर उसके शरीर के बंद पड़े हाथ-पैर अपना-अपना काम करने लग जाते हैं। जो मरीज लकवे की वजह से बोल नहीं पाते, वे भी बोलने लगते हैं।मंदिर में आने वाले लोगों के लिए नि:शुल्क रहने व खाने की व्यवस्था भी है। यहां बहुत सारे लोगों को इस बीमारी से राहत मिली है। भक्त यहां दान करते हैं, जिसे मंदिर के विकास के लिए लगाया जाता है।कुछ बचे हुवे पैसो को मानव सेवा के लगा दिया जाता है ताकि सभी लोगो का भला हो सके

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