फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का नया बयान जारी, मुस्लिमों को लेकर कही ये बड़ी बात

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तुर्की, बांग्लादेश, सऊदी अरब, ईरान,पाकिस्तान सहित दुनियभार में इन दिनों मुसलमान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बेहद खफा हैं। जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं, मैक्रों के पुतले जलाए जा रहे हैं। फ्रांस के उत्पादों का बहिष्कार किया जा रहा है तो कई इस्लामिक देश राजनयिक रिश्ते तोड़ने पर विचार कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्या होगा गया? मैक्रों से मुसलमान इतने नाराज क्यों हैं? आइए आपको पूरी बात विस्तार से बताते हैं। लेकिन इससे पहले जानते हैं कि इस्लामिक देशों में किस तरह हंगामा बरपा है।

तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयप एर्दोगान ने मैक्रों की आलोचना करते हुए कहा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति को इस्लाम के प्रति उनके रवैये को लेकर मानसिक जांच करानी चाहिए। सऊदी अरब, ईरान और पाकिस्तान सहित इस्लामिक देशों के नेता कुछ इसी अंदाज में मैक्रों को खरी-खोटी सुना रहे हैं, जबकि बांग्लादेश, फिलिस्तीन जैसे देशों में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और फ्रेंच सामानों के बहिष्कार का ऐलान किया।

आखिर क्या है कलह की जड़?

असल में इस विवाद की शुरुआत 16 अक्टूबर को हुई जब फ्रांस में सैमुअल पैटी नाम के एक शिक्षक की स्कूल के पास ही गला काटकर हत्या कर दी गई। सैमुअल पैटी ने अपने स्टूडेंट्स को पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाए थे। पेरिस से 24 किलोमीटर की दूरी पर इस नृशंस हत्या को 18 साल के एक नवयुवक ने अंजाम दिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने बताया कि वह पैंगबर मोहम्मद के कार्टून बनाए जाने को लेकर खफा था।

सैमुअल पैटी की हत्या से फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों बेहद नाराज हुए और उन्होंने पैटी के प्रति सम्मान जाहिर किया। इसके बाद पैटी को मरणोपरांत फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया गया और इस समारोह में खुद मैक्रों शामिल हुए। उन्होंने इसे इस्लामिक आतंकवाद करार दिया था। कई इस्लामिक देशों को यह नागवार गुजरा और उन्होंने पैगंबर का अपमान करने वाले को सम्मानित किए जाने की निंदा की।पिछले हफ्ते मैक्रों की टिप्पणी से मुस्लिम-बहुल देश नाराज हो गए, जिसमें उन्होंने पैगंबर मुहम्मद के कार्टून के प्रकाशन या प्रदर्शन की निंदा करने से इनकार कर दिया था। फ्रांस धार्मिक व्यंग्य को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आने वाली चीजों में से एक मानता है, जबकि कई मुसलमान पैगंबर पर किसी भी कथित व्यंग्य को गंभीर अपराध मानते हैं। पैटी की हत्या से पहले ही मैक्रों और मुसलमानों के बीच दरार बढ़ गई थी जब उन्होंने 2 अक्टूबर को इस्लामिक अलगाववादियों के खिलाफ मुहिम छेड़ने का ऐलान किया और कहा कि केवल उनके देश में नहीं बल्कि दुनियाभर में इस्लाम खतरे में है। उस दिन उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार 1905 के उस फ्रेंच कानून को मजबूत करेगी जो चर्च और राज्य को अलग करता है। अपने भाषण में, मैक्रों ने दावा किया कि फ्रांस में शिक्षा और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों से धर्म को अलग करने के लिए मुहिम में “कोई रियायत” नहीं दी जाएगी। नया बिल दिसंबर में आने की उम्मीद है।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो का अहम बयान- ‘अब डर पाला बदलेगा’

समय आ गया है कि दुनिया भर के लोग इस्लामिक कट्टरवाद की जमीनी हकीकत को समझें। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो का अहम बयान है कि ‘अब डर पाला बदलेगा।’ क्या दुनिया के दूसरे देश उनकी इस नीति से सहमत हैं? यदि सहमत नहीं हैं तो उनके पास दूसरा क्या रास्ता है, क्योंकि चुप बैठना कोई विकल्प नहीं है और डर को पाला बदलने के लिए जरूरी है कि न केवल कट्टरपंथियों से सख्ती से निपटा जाए, बल्कि उनके समर्थन को सीमित किया जाए। इससे पहले कि गैर मुस्लिम बिरादरी इन कट्टरपंथियों का विरोध करते-करते पूरे समुदाय के ही खिलाफ हो जाए, मुस्लिम समुदाय इन तत्वों के खिलाफ खड़ा हो। दुनिया में शांति और भाईचारे के लिए यही एक रास्ता है।

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