गब्बर सिंह कौन था अजीत से नेहरू भी थे परेशान और चलती राहों पर लोगों के काट लेता था नाक कान, जानिए कौन था गब्बर सिंह

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आजादी के बाद भारत में कई ऐसे लाल थे जिन्होंने अपने काम से पहचान बनाई थी.कुछ ऐसे भी हुए जिन्होने अपने जुर्म की दुनिया के कारण नाम कमाया था.शोले फिल्म में गब्बर का किरदार ने सभी को प्रभावित किया था.इस फिल्म में गब्बर डाकू के किरदार से खूब सराहा गया था.गब्बर फिल्म की रील लाइफ ही नही बल्कि असल में एक डाकू था.अपने काले कारनामों से उसने पुलिस और प्रशासन को हिला कर रख दिया था.बताया जाता है की गब्बर सिंह पुलिस से सबसे ज्यादा नफरत करता था.डाकू गब्बर सिंह का जन्म 1926 में मध्य प्रदेश के जिले भिंड के छीटें से गांव डांग में हुआ था.गब्बर सिंह ने जुर्म की दुनिया में आने के लिए 1955 तक अपना घर और गांव को अलविदा कह दिया था.चंबल का बीहड़ डाकुओं की पनाहगाह बन गया था.उस समय के सबसे बड़े डाकू कल्याण सिंह की गैंग में शामिल हो गया.

.दोनो ने मिलकर कई घटनाओं को अंजाम दिया.लेकिन कुछ समय बाद दोनों के बीच दूरियां बन गई और गब्बर सिंह ने अपना अलग ही गैंग बना लिया.कुछ समय के अंदर ही पूरे चंबल के इलाके में उसकी गैंग ने आतंक मचा दिया और वह फेमस डाकू बन गया.बिहड़ो में गब्बर सिंह का इतना खोफ था की कोई भी उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत भी नहीं कर सकता था.बड़ी बड़ी घटनाओं को अंजाम देकर अपना खोफ लोगो के दिलो में बसा लिया था.पुलिस प्रशासन में गब्बर सिंह आतंक का दूसरा नाम बन चुका था.गब्बर सिंह को किसी बाबा की भविष्यवाणी के लिए 116 लोगो की नाक कान कटकर देवी को भेट करने होगे जिससे पुलिस उसे कभी पकड़ भी पाएगी.गब्बर सिंह ने इस बात के लिए सैकड़ों लोगों को शिकार किया.इसमें पुलिस भी शामिल थी.गब्बर सिंह के बढ़ते कहर से तीन राज्यों की पुलिस परेशान हो गई थी.सरकार भी किसी तरह गब्बर सिंह को पकड़ कर सजा देना चाहती थी.उस समय भारत के सबसे बड़े क्रिमिनल बन चुके गब्बर सिंह पर 50 हजार का इनामी राशि का पुरस्कार रखा.

डाकू गब्बर सिंह को पकड़ना काफी मुश्किल होता जा रहा था.कहा जाता है की गब्बर सिंह की गैंग से मुठभेड़ होती जब पुलिस को ज्यादा ही नुकसान हो जाता था.कहा जाता है उस समय 16 गैंग मोजूद थे.भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी चंबल के हालात और बढ़ते डाकुओं के कहर को लेकर फिक्रमंद थे.1959 गब्बर सिंह को पकड़ने का जिम्मा पुलिस ऑफिसर राजेंद्र प्रसाद मोदी को दिया गया था.लेकिन इस टीम के अधीक्षक के. एफ.रुस्तमजी थे. जो पद्म विभूषण से समानित है.उन्होंने की गब्बर सिंह को दुनिया से अलविदा कह दिया था.एक।गांववाले की सूचना पर पुलिस टीम ने गब्बर सिंह को चारो तरफ से घेर लिया था.दोनो ओर से फायरिंग की गई.इस दौरान प्रसाद मोदी ने 2 ग्रेनेड फेक कर डाकुओं की ताकत को खत्म कर दिया था.डाकू गब्बर सिंह और उसकी गैंग पूरी तरह से साफ हो गई और पूरा बीहड़ इलाका उसके खोफ से मुक्त हो गया.

गब्बर सिंह पर किताब पीवी राजगोपाल ने लिखी जो रूस्तमाजी के मारहदर्शक में लिखी गई.पुस्तक का नाम ” द ब्रिटिश द बेडिट्स एंड द बोर्डरमैन” हम फिल्म शोले की बात करे तो उसके लेखक सलीम खान हैं.उनके पिता मध्य प्रदेश पुलिस में थे जो बीहड़ में ड्यूटी करते थे.वो भी गब्बर सिंह के किस्सों से वाकिफ थे ।

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