हायपरलूप का हुआ पहला मानव परीक्षण, 160 km प्रतिघंटा की रफ्तार को छुआ

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नई दिल्ली: अब ज्यादा दिन और नहीं नई तकनीक से चलित हायपरलूप से यात्रा की जा सकेगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा चंद मिनटों में कराने का दावा करने वाली कंपनी वर्जिन हायपरलूप ने रविवार को पहली बार इस प्रोजेक्ट में मानव परिक्षण (Human Test) किया है। इस प्रोजेक्ट में मानव परिक्षण लॉस वेगास, नेवाडा के में किया गया। इस हायपरलूप में पहली बार सवारी करने वाले और कोई नहीं बल्कि इस कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी जॉश गीजेल और यात्री अनुभव प्रमुख सारा लुचीऑन हैं।

लगभग 500 मीटर और 3.3 मीटर व्यास के हायपरलूप ट्रैक को खासतौर पर टेस्टिंग के लिए तैयार किया गया था। टेस्टिंग के दौरान हायपरलूप को 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर चलाया गया। कंपनी ने दावा किया कि अब तक हायपरलूप का 400 से अधिक बार टेस्ट किया जा चुका है।

हायपरलूप हवा के दबाव और घर्षण के सिद्धांत पर काम करता है। इस हायपरलूप के ट्रैक को ट्यूब के जैसा डिजाइन किया गया है जो चारों तरफ से बंद है। हवा के अवरोध को कम करने के लिए इस ट्यूब के अंदर की हवा को निकाल कर वैक्यूम बनाया जाता है।

टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक और सीईओ एलोन मस्क द्वारा साझा की गई हाइपरलूप की मूल अवधारणा के बाद वर्जिन हाइपरलूप की स्थापना 2014 में की गई थी। मस्क ने दावा किया था कि हाइपरलूप वैक्यूम में 1,223 किमी प्रति घंटे की शीर्ष गति प्राप्त करने में सक्षम होगा।

जानिए भारत में हायपरलूप का प्रोजेक्ट का हाल

भारत में वर्जिन हायपरलूप ने बेंगलुरु में प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने के लिए कर्नाटक सरकार के साथ समझौता ज्ञापन में हस्ताक्षर किया है। कंपनी बेंगलुरु एयरपोर्ट को हाइपरलूप द्वारा शहर के अन्य इलाकों से जोड़ने के प्रोजेक्ट पर काम करेगी।

वर्जिन हायपरलूप ने कहा है कि शहर में हायपरलूप के निर्माण के पहले इसकी व्यवहारिता का परीक्षण किया जायेगा जिसमे 6 महीनों का समय लग सकता है। इस हायपरलूप की मदद से प्रतिघंटा 1,000 यात्रियों को बेंगलुरु एयरपोर्ट से सिटी सेंटर तक ले जाया जा सकता है। यह हायपरलूप 1,080 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगी।

 

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