रिक्शावाले के IAS बेटे की आपबीती, कभी दोस्त के पापा ने किया था बेइज्जत

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दोस्तों कहते है की दुनिया बदलने का हुनर सिर्फ भगवन ने इंसान को दिया है और ये दुनिया उस इंसान की जिंदगी होती है इंसान चाहे तो सब कुछ कर सकता है कड़ी मेहनत और लगन से अपने विरोधियों को पैरो में झुका सकता है.दोस्तों समय का चक्र जब चलता है तो उसमे सभी आते है और किसी का भी समय एक जैसा नहीं रहता इस लिए कभी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए क्या पता कल आप की मुसीबत में वही शक्श काम आ जाए,मगर फिर भी दोस्तों दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो मजाक उड़ाने में सबसे आगे रहते हैं लेकिन कई उन्हें कभी एहसास होता हैं की जिसका हम मजाक उड़ा रहें हैं वे कभी हमसे आगे भी निकल सकता हैं ऐसा ही किस्सा आज हम आपको बताने वाले हैं जहां एक रिक्शावाला का बेटा आईएएस अफ़सर बनकर अपने घर वापस लौटा तो आइए आपको बताते हैं पूरी बात क्या हुआ जब इनके साथ ये सब हुआ

दरअसल नारायण जायसवाल एक रिक्शा चालक हैं उनके 3 बेटी और एक बेटा हैं पत्नी की तबियत से लेकर बेटियों की शादी के खर्च तक नारायण जी के पास बस 20 में से एक ही रिक्शा बचा जहां वह अपने बेटे गोविंद को पढ़ाने के लिए चलाते थे आर्थिक स्थिति इतना खराब थी की किराये के मकान पर रहना पड़ता था इतना ही नहीं पिता और बेटे को कभी-कभी सुखी रोटी ही खानी पड़ती थी दरअसल गोविंद ने अपने मन में ठान लिया था की वह बड़ा होकर आईएएस अफसर ही बनेगा।

लेकिन लोग इसी बात को लेकर गोविंद और उनके पिता को ताना मारते थे ग्रेजुएशन खत्म करते ही गोविंद सिविल सर्विसे के लिए 2007 में दिल्ली चला गया वहां उसने अपने खर्च के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया, 2007 में गोविंद पहले ही अटेम्पट में IAS के लिए सलेक्ट हो गया आपको बता दें की उनका स्थान 48वें रैंक में था गोविंद ने कहां आज जो भी में हूँ अपने पिता के वजह से उन्होंने कभी मुझे ये एहसास नहीं होने दिया की मैं एक रिक्शावाला का बेटा हूँ।

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