शताब्दी, राजधानी जैसी ट्रेनाें में चोरी करने प्लेन से आते थे चोर, जानिए कैसे हुआ खुलासा ?

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जीआरपी और आरपीएफ ने शताब्दी और राजधानी जैसी ट्रेनों में चोरी करने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आपको बता दें कि चोरी करने के लिए ही शताब्दी राजधानी में सफर करते थे और दिल्ली से फ्लाइट पकड़कर लखनऊ आ जाते थे। लगातार तीन चोरियां हुईं लेकिन पुलिस तब हरकत में आई जब मुजफ्फरपुर से भाजपा सांसद की पत्नी के 3 लाख रुपए से भरा बैग राजधानी से पार हो गया। सभी घटनाओं का मिलान किया गया तो एक संदिग्ध की पहचान हुई। पुलिस द्वारा  उसका मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाया गया तो पकड़ में आ गया। राजधानी एक्सप्रेस में तीसरी चोरी को अंजाम दिया और दिल्ली से अमौसी एयरपोर्ट लखनऊ उतरा तो पुलिस ने दबोच लिया। इसके पास से 1.95 लाख रुपए व उसके साथी के पास से 8 हजार रुपए और कार बरामद हुई है।

बिहार मुजफ्फरपुर से सांसद अजय निषाद पत्नी रमा के साथ 27 अक्टूबर को पटना राजधानी के एसी प्रथम के एचवन कोच में दिल्ली के लिए सवार हुए थे। रात में रमा टॉयलेट चली गईं और लौटीं तो पर्स पार हो चुका था। उसमें तीन लाख रुपए थे। सांसद ने दिल्ली स्टेशन पर मुकदमा दर्ज कराया था। रेलवे के सभी उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी। इसके बाद जीआरपी और आरपीएफ ने जांच पड़ताल शुरू की। जांच में पता चला कि कानपुर सेंट्रल तक सब ठीक था। चोरी यहां से ट्रेन छूटने के बाद हुई। एसपी रेलवे मनोज झा और वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त आरपीएफ मनोज कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। जांच में पता चला कि इसी ट्रेन में 18-19 अक्टूबर को भी रात ढाई से तीन बजे के बीच प्रथम श्रेणी कोच में चोरी हुई थी।

सांसद पत्नी का बैग भी इसी वक्त चोरी हुआ। दोनों घटनाओं का तरीका और समय एक जैसा था। पुलिस ने सेंट्रल रेलवे स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज खांगाला तो एक संदिग्ध व्यक्ति दोनों दिन ट्रेन में सवार होता दिखा। यह राजधानी के एसी थ्री कोच में चढ़ा था। ट्रेन के एसी कूपे में सफर करने वाले यात्रियों के मोबाइल नंबर निकाले गए। यह देखा गया कि किस यात्री ने इस अवधि में कितनी बार दिल्ली का सफर किया है। मोबाइल नंबर से पता चला कि एक यात्री तीनों दिन ट्रेन में सफर कर रहा है और चोरी की घटना हो रही है। रेलवे कामर्शियल डिपार्टमेंट से रिजर्वेशन डिटेल निकलवाई गई। इसके बाद यह नंबर सर्विलांस पर ले लिया गया। पुलिस नंबर की लोकेशन ट्रेस कर रही थी। यह पता चल चुका था कि एक यात्री की लोकेशन सुबह दिल्ली में मिल रही है और दोपहर बाद लखनऊ में। दो दिन उसकी लोकेशन इसी तरह की मिली। यह जांच चल ही रही थी कि 1 व 2 नवंबर को फिर इसी ट्रेन चोरी हो गई। संदिग्ध मोबाइल नंबर की लोकेशन चेक की गई तो सुबह दिल्ली और फिर सीधे एयरपोर्ट दिखी। पुलिस तुरंत सक्रिय हुई। अमौसी एयरपोर्ट पर पहरा सख्त कर दिया गया। दो नवंबर को यात्री ने राजधानी में चोरी की और फ्लाइट से अमौसी लौट आया। एयरपोर्ट से निकलते ही पुलिस ने पार्किंग में दबोच लिया। पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम पुनीत कुमार, निवासी पुरैना जहानाबाद पीलीभीत बताया। पुनीत से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने उसके साथी देवरिया के रामघर मलई निवासी प्रदीप यादव को दबोच लिया। जीआरपी इंस्पेक्टर राममोहन राय, आरपीएफ प्रभारी पीके ओझा ने बताया कि पुनीत के खिलाफ चारबाग स्टेशन लखनऊ में भी कई मुकदमे दर्ज हैं।

पंद्रह दिन के भीतर पटना राजधानी में हुई तीन चोरी

आरपीएफ और जीआरपी के हत्थे चढ़े हाईप्रोफाइल लुटेरे पुनीत ने 15 दिनों के भीतर तीन बार पटना राजधानी एक्सप्रेस में चोरी की। कानपुर से ही तीनों बार ट्रेन एक एसी थ्री कूपे में रिजर्वेशन करा चढ़ता था और रास्ते में वारदात को अंजाम देने के बाद दिल्ली स्टेशन पर उतरता था। घंटे-दो घंटे रुकने के बाद आटो या टैक्सी से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचता था और फ्लाइट से अमौसी लौट आता था।

कोच अटेंडेंट की भूमिका संदिग्ध होने पर संदेह

एसपी जीआरपी मनोज झा ने बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि एसी थ्री का टिकट लेकर राजधानी में सवार होने वाला यात्री एसी प्रथम श्रेणी कोच में कैसे घुसा। एसी फर्स्ट कोच दूसरे कोचों से कनेक्ट नहीं होता। जाहिर सी बात है कि रेलवे के ही किसी स्टाफ या कोच अटेंडेंट ने मदद की होगी। नहीं भी मदद की तो कोच कंडक्टर और अटेंडेंट ने यह चेक क्यों नहीं किया कि कोच में यात्रियों की संख्या कैसे अधिक हो रही है। एसी फर्स्ट कोच में बहुत ज्यादा यात्री नहीं होते हैं। इस आधार पर कोच अटेंडेंट की भूमिका की भी जांच हो रही है।

 

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