लाखों किसानों के लिए खुशखबरी,सरकार ने बढ़ाया पीएम-कुसुम योजना का दायरा, क्या होगा फायदा

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देश के लाखों किसानों के लिए खुशखबरी है। सरकार ने प्रधानमंत्री-कुसुम योजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब बदली हुई व्‍यवस्‍था के बाद किसानों को नया अलॉटमेंट लेटर जारी होगा। इसके बाद वे अपना बिजली संयंत्र शुरू कर सकेंगे। आपको बता दें कि राहत की बात तो यह है कि अगर बिजली उत्पादन निर्धारित न्यूनतम क्षमता से कम होता है, उस पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। यह मंजूरी कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने दी है। जारी बयान के मुताबिक अब बंजर, परती, कृषि भूमि, चारागाह और दलदली भूमि पर भी सौर बिजली संयंत्र लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा छोटे किसानों की मदद के लिये 500 किलोवाट से कम क्षमता वाली परियोजनाओं को राज्य भी मंजूरी दे सकते हैं। मंत्रालय के बयान के मुताबिक चुने गए नवीन ऊर्जा उत्पादकों को अनुबंध आवंटन पत्र मिलने की तारीख से 12 महीने के भीतर सौर बिजली संयंत्र शुरू करना होगा। तकनीकी-वाणिज्यिक व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी। केन्द्र सरकार की कुसुम योजना के तहत सैकड़ों किसानों को सौर ऊर्जा संयंत्र आवंटित किए गए हैं। राजस्थान देश का पहला राज्य है जिसने किसानों की चयन प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है तथा देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा यहां कुसुम योजना में सर्वाधिक क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित होंगे। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड ने प्रधानमंत्री कुसुम योजना कंपोनेंट-ए के अन्तर्गत प्रदेश के किसानों को सौर ऊर्जा संयंत्र आवंटित किए है।

 कुसुम योजना

किसान उर्जा सुरक्षा और उत्थान महाअभियान (कुसुम) योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार ने देशभर में सिंचाई के लिए प्रयुक्‍त होने वाले सभी डीजल/बिजली के पंप को सोलर ऊर्जा से चलाने की योजना की शुरुआत की है। इसमें बाकी रकम केंद्र सरकार किसानों को बैंक खाते में सब्सिडी के तौर पर देती है। कुसुम योजना में बैंक किसानों को लोन के रूप में 30 फीसदी राशि का भुगतान करेंगे।

किसानों को क्या होगा लाभ

– केन्द्र सरकार की कुसुम योजना में राजस्थान के 623 किसान 722 मेगावाॅट क्षमता का सौर उर्जा उत्पादन करेंगे।

– बंजर और अनुपयोगी जमीन में सोलर प्लांट लगा कर सौर उर्जा उत्पादन करने वाली इस योजना के अंतर्गत किसानों द्वारा स्वयं की अनुपयोगी या बंजर भूमि पर 0.5 से 2 मेगावॉट क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जा सकती है।

– इससे किसानों को उनकी बंजर या अनुपयोगी भूमि से 25 वर्ष तक नियमित आय प्राप्त होगी। इसके साथ ही प्रदेश के किसानों को दिन के समय कृषि कार्य के लिए आसानी से बिजली मिल सकेगी।

– इसके अतिरिक्त वितरण निगमों की विद्युत छीजत में तथा सिस्टम विस्तार पर होने वाले खर्च में भी कमी होगी।

अब आगेक्या होगा

आपको बता दें कि किसानों के द्वारा स्थापित संयंत्रों से उत्पादित विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा 3.14 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली क्रय की जायेगी। चयनित किसानों एवं विकासकर्ताओं को संयंत्र स्थापित करने में किसी प्रकार की परेशानी ना हो इस के लिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम में एक विशेष सहायता प्रकोष्ठ स्थापित किया जायेगा। कोई भी चयनित किसान या विकासकर्ता इस सहायता प्रकोष्ठ से संपर्क कर अपनी समस्या का समाधान करा सकेंगे।

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