शादी के कुछ चंद दिन बाद पति ने छोड़ा, फिर ऐसे IRS ऑफिसर बन गई ये लड़की

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हमारे भारतीय समाज में शादी ब्याह ना कि एक रीति है बल्कि विवाह संस्कार के रूप में माना जाता है, जिसमें पुरुष प्रधान संस्कृति की बदौलत महिलाओं का शादी के बाद पति से अलग होने पर समाज द्वारा लाखों सवाल खड़े किये जाते है, और संपुर्णत: सब दोष उस महिला के उपर डालकर समाज परिवार में न जाने कितने ताने सुनने पड़ते है और न जाने लोगों की कितनी कड़वी बाते सुननी एवं सहनी पड़ती है, इससे पीडित महिला टूट जाती है, कोई जीवन को ख़त्म कर देती है तो कइयों का जीवन निराशा के घने अंधेरें मैं चला जाता है! टूटी शादी का जिम्मा केवल महिला के माथे मढ़ा जाता है और हरपल उसे दुर्बल और मानसिक रूप से कमजोर बनाने का एहसास दिलाया जाता है!

आज हम ऐसी ही परिस्थितियों से बाहर निकलर ख़ुद को दुनिया के सामने सिद्ध कर IRS ऑफिसर के रूप में लाने वाली एक संघर्षगाथा हम आपको बताने जा रहे है।

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गुजरात (Gujarat) के अमरेली (Amreli) जिले में सावरकुंडा (Savarkunda) की रहनेवाली कोमल गणात्रा (Komal Ganatra) का जीवन-संघर्ष उनके जीवन की प्रेरणादायी कहानी न तो केवल आपको आपके विचार पर ग़ौर करना सीखायेंगी बल्कि साथ-साथ तमाम उन महिलाों में ऐसी ऊर्जा एवं साहस का निर्माण करा देगी जो जीवन में कुछ बेहतर करना चाहती है और अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है! उनका सफ़र अपने मायने में बेहद प्रभावशाली एवं अनुकरणीय है।

कोमल गणात्रा (Komal Ganatra) का जन्म 1982 में गुजरात के अमरिली जिले के सावरकुंडा में हुआ, बचपन से पढ़ाई ने तेज रही कोमल गुजराती मीडियम से पढी हुई है! बड़े होकर सरकारी ऑफिसर बनना था, जी जान मेहनत करके शुरवाती दौर से अपने हर क्लास में वे पढाई में अव्वल रहती थी, स्कुल की पढाई ख़त्म होने के बाद उन्होंने ओपन युनिवर्सिटी से में स्नातक उत्तीर्ण किया और गुजराती लिटरेचर में टॉपर भी आयी।

वे 3 युनिवर्सिटी से अलग-अलग भाषाओं से ग्रॅज्युएट भी है! पढ़ाई के साथ-साथ लोकसेवा आयोग और प्रतियोगिता परीक्षा का अभ्यास शुरु कर दिया, 2008 में बतौर उनकी मेहनत उनका एग्जाम पूर्व परीक्षा एवं मुख्य परीक्षा को पास कर के साक्षात्कार हेतु बुलाने का लेटर तक हाथ में आ गया था, उसी समय उनके परिवार वालों ने उनकी शादी न्युजीलैंड में स्थित एक NRI शैलेश के साथ तय कर दी। शैलेश के साथ न्युजीलैंड में घर बसाने के सपनें देख रही कोमल ने अपने गुजरात लोकसेवा आयोग की परीक्षा में पास होकर अगले चरण में साक्षात्कार के बारे अपने होने वाले पति से बात की, न्युजीलैंड में पति के साथ स्थायिरुप से रहना है, इसलिये उनके पति के कहने पर गुजरात लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास होने पर भी वे साक्षात्कार में नहीं गई और पति के बातों का सम्मान स्वरुप एक मौका भी छोड़ दिया!

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उनकी शादी को कुछ चंद दिन ही हुये थे के उनके पति शैलेश न्युजीलैंड वापस अकेले लौट गये और फिर कोमल पर नियति का मानो कहर टूँट पड़ा! इतने ख़ुशी-खुशी चलनेवाले रिश्ते अब दहेज के लिये उन्हे प्रताडित करने लगे, उनको ससुराल में अपने माता पिता से दहेज स्वरुप पैसो की मोटी रक्कम की माँग होने लगी!

ऐसे कैसे वह पैसे की माँग कर सकती थी कोमल? जब उनको बड़े प्यार दुलार से पाला बड़ा किया और सारी ज़िन्दगी भर की पुँजी लगाकर शादी भी तो धुमधाम से करवाई गयी थी! वो सब ताने सुनती रही, पर इतने कठोर और लालची पत्थर दिलवाले लोंगो ने उनकी एक ना सुनी! पैसे ऐठ़ने के लिये ससुराल वालों कोमल को शादी के 15 दिन बाद घर से बाहर निकाल दिया!

अपने पति को न्युजीलैंड में ये वारदात बताना चाहा तो उसके पति का कोई संपर्क नहीं हो रहा था और ना ही कोई ख़बर या जवाब आ सका

15 दिन में ससुराल वालो का प्यार-दुँलार घृणा में परिवर्तित हुआ, पैसो के लिये बारबार प्रताडित हुई नई नवेली दुल्हन का ससुराल वाले लालची दरींदो से पाला पड़ा था। ससुराल से घर से बाहर निकालनेपर वे अपने मायके गुजरात के साँवरकुंडला में लौट आयी।

अपने माता पिता के सामने उन्होने ससुराल में उनके साथ हुई दरिंदगी हैवानियत और दहेज के लिये प्रताडना की हकिगत बयाँन कर दी, और उन्हे घर से बाहर निकाल दिया है ये सब सुनके उनके माता पिता नें उन्हे अपने साथ रहने को कहा और वे ख़ुद इस शादी को बचाने के प्रयास में जुट गये, कोमल को घर से निकालने के बाद उनके ससुराल वाले मानो अपरिचित भाँति व्यवहार करने लगे, अपनी शादी बचाने हेतु कोमल ने न्युजीलैंड के राजदूत से परराष्ट्र मंत्रालय में जाकर न्युजीलैंड सरकार को उनके पति को ढुॅंढने की गुजारीश की, मगर हर बार जवाब में कुछ हासिल नहीं हुआ!

अब धीरे-धीरे उन्हें समझ आ गया के NRI रिश्ते के नाम पर बड़ा दहेज लेकर फरार होनेवाले लोगों का वे शिकार बन रहे थे! उन्हे फँसाया जा रहा है

लगातार पति से संपर्क करने का उनका हर प्रयास फेल हो रहा था! चारों तरफ़ से सिर्फ़ अँधेरा ही अँधेरा अपने निकट आने जैसा उनको महसूस हुआ, पीहर में रहने आयी कोमल को आस पड़ोस के वाले लोगो ने एवं परिवार के निकटसम्बंधीयों द्वारा कडवी बातें और ताने लोग सुनने मिलते थे, उनको उनके नसिब के लिये कोसा जाता था! ऐसे परिस्थिति में ख़ुद को टूटने से बचाने के लिये और उन्होंने अपने माता पिता का घर छोड़ 40 किलोमीटर दुर एक छोटे से गाँव में अकेले रहकर एक स्कूल में नौकरी करने का फ़ैसला किया और वह बतौर शिक्षिका के रूप में स्कुल में काम करने हेतु मायके से चली गई।

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स्कुल टीचर के हर कर्तव्य को पार करते हुए, एकदिन की भी छुट्टी लिये बिना कोमल ने स्कूल के कर्तव्य के साथ UPSC की पढ़ाई का नया सफ़र शुरु कर लिया, दिनभर में स्कुल में पढ़ाना और स्कुल के बाद अपनी किताबे उनके साथी बने!

3 बार लगातार परीक्षा में असफल होने पर भी उन्होने प्रयास जारी रखा और अपनी पढ़ाई और लगन से 2012 में भारत में 591 रैंक में आकर अपना सपना पूरा कर दिखाया, उन्हें अपने मुख्य परीक्षा हेतु मुंबई जाना था ऐसे में स्कुल के बच्चों की पढ़ाई का नुक़सान नहीं हो इसलिये उन्होने परीक्षा के लिये ट्रेन से जाकर मिलों कई घंटो का सफ़र कर एग्जाम देने जाने का फ़ैसला किया और वैसा ही किया शनिवार को एग्जाम होने पर ट्रेन से लौटकर सोमवार को फिर से स्कुल के कामो में जुट जाती थी!

कोमल अब भारतीय रक्षामंत्रालय I.R.S सेवा में बतौर ऐडमिनिस्ट्रेटर ऑफिसर के रूप में सेवा दे रही है, और उन्होंने अब दुसरी शादी कर ली है जिससे वे और उनका परिवार बहुत खुश है, अपने पति और बेटी के साथ खुशहाल ज़िन्दगी का अनुभव कर रहे है।

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इतने अचानक से आये मुसीबतों से टकराकर कोमल ने अपने आप को साबित कर दिखाया, अपने एक इंटरव्युव में उन्होंने अपने विचार कुछ इस तरह जाहीर किये, ‘शादी से पहले हर लड़की को ऐसा लगता है कि शादी से जीवन परिपुर्ण होता है’ , मगर शादी के बाद मुझे एहसास हुआ के, “एक लड़की का जीवन सिर्फ़ शादी से ख़त्म नहीं होना चाहिये, शादी ही सबकुछ नहीं है!” अपने सपने पूरे करना ही जीवन का लक्ष्य होना चाहिये, जिस में आप का आत्मसम्मान बना रहे और समाज के लिये उदाहरण बनों की समाज की पुरानी धारणाएँ बदलना कितना ज़रूरी है!

कोमल (Komal Ganatra) के संघर्ष की कहाणी हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो ये सीख देती है, टूटकर भी स्वयं को जोड़े रखने की कला आना ही ज़िन्दगी है, खुद को सँभालना और अपने बुरे हालातों से बाहर निकल कर अपने आप को दुनिया में मिसाल के तौर पर स्थित करना जीने का नया विचार एवं विश्वास दिलाती है!

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