पुणे की रहने वाली नीला कर रहीं हैं बिना मिट्टी के जैविक खेती, जनिये कैसे!

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प्रदूषण के इस दौर में जैविक खेती का चलन बहुत बढ़ गया है। इसके लिए लोग अपने घरों में ही गमलों, पुराने डिब्बों तथा टैरेस गार्डन के माध्यम से खेती कर रहे हैं। पुणे की रहने वाली नीला रेनाविकर पंचपोर ने भी अपने घर में टैरेस गार्डन तैयार किया, लेकिन उनके इस गार्डन की सबसे खास बात यह है कि वह बिना मिट्टी के ही पौधे उगाती हैं।
जी हां, यह बात हैरान कर देने वाली है, पर है एकदम सच। एक अकाउंटेंट, पेशेवर मैराथन रनर नीला अब एक होमगार्डनर भी हैं। उन्होंने अपने 450 वर्ग फीट के टैरेस में तमाम किस्मों के फूल,सब्जियों और फलों के पौधे बिना मिट्टी के उगाए है

Image Source– The Better India

क्या है तरीका बिना मिट्टी पौधे उगाने का?

बिना मिट्टी के पौधे लगाने के लिए नीला किसी रॉकेट साइंस का इस्तेमाल नहीं करती, इसके लिए वह केवल घर पर तैयार की गई कंपोस्ट का प्रयोग करती हैं। कंपोस्ट तैयार करने के लिए वह सूखे पत्ते, रसोई का कचरा और गोबर का मिश्रण प्रयोग करती हैं।
नीला बताती है कि सूखी पत्तियों के साथ सॉयललेस पॉटिंग मिक्स में वॉटर रिटेंशन ज्यादा होता है और हवा का आदान-प्रदान भी अच्छा होता है। रसोई से निकले फलों और सब्जियों के छिलके और गोबर की खाद मिलाने से पौधों को पोषण मिलता है। बस इस काम को करने के लिए धैर्य और समर्पण की जरूरत है, ऐसा नीला का मानना है।

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कैसे की नीला ने टैरेस गार्डन की शुरुआत?

किसी भी नई चीज की शुरुआत का कारण आपको मिली कोई प्रेरणा ही होती है। नीला को जैविक खेती की प्रेरणा भी अपने दोस्तों से मिली। उनके एक दोस्त अनुभवी होमगार्डनर हैं, जिन्होंने नीला को भी यह कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। नीला शुरू से ही पर्यावरण के लिए जागरूक थी, अतः अपने दोस्त की सलाह पर उन्होंने अपनी रसोई से निकलने वाले कचरे को अलग करना सीखा और उससे कंपोस्ट तैयार करने की शुरुआत की।

कंपोस्ट तैयार करने के लिए उन्होंने सूखी पत्तियों को इकट्ठा किया और एक खेत से ताजा गाय का गोबर मंगवा कर दोनों चीजों को आपस में मिलाया तथा कुछ समय तक रसोई से निकलने वाले कचरे को उस में डालती गयी। एक महीने बाद कंपोस्ट पूरी तरह से तैयार हो गया। बिना मिट्टी के खेती करने की मूल बातें उन्होंने इंटरनेट से सीखी। कई वीडियो के माध्यम से उन्होंने समझा कि पौधों को कितने पानी की जरूरत होती है और उनमें खाद का प्रयोग कैसे किया जाता है।

नीला बताती हैं बिना मिट्टी के खेती करने के 3 फायदे हैं -कीड़े नहीं लगते हैं, फालतू घास नहीं होती और कीटनाशकों और उर्वरकों की जरूरत बहुत कम होती है। बिना मिट्टी के बागवानी करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पानी और पोषण सीधे जड़ों में उपलब्ध होता है।
नीला बताती हैं कि जब भी उन्होंने इस तरह से एक पौधा उगाया तो आगे और भी प्रयोग करने के लिए प्रेरित हुई।

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किन फलों, सब्जियों और पौधों की करती हैं खेती?

नीला ने सर्वप्रथम एक बेकार रखी बाल्टी में कंपोस्ट तैयार किया और सबसे पहले खीरे के बीज लगाएं। समय-समय पर पानी और पोषण देने से 40 दिनों में खीरे की दो फसलें तैयार हो गई। इसके बाद उन्होंने टमाटर, मिर्च और आलू आदि सब्जियां भी उगाई।
इन पौधों को लगाने के लिए वह बेकार बाल्टी, बोतलों, थर्माकोल के डिब्बों , कंटेनरों, बैग और टोकरियों का प्रयोग करती है जिससे वेस्ट सामान रिसायकल किया जा सके। आज उनके बगीचे में 100 से ज्यादा कंटेनर है, जिसमें आलू , शकरकंद, बैंगन, शिमला मिर्च जैसी सब्जियां उगाई जाती है। बोतलों में गाजर और हरे प्याज तथा गोभी, फूलगोभी और अन्य पत्तेदार सब्जियां थर्माकोल के बक्से में उगाए जाते हैं। उनके गार्डन में नीला पेरीविंकल और पोर्टूलाका जैसे फूलों के पौधे भी लगाए गए हैं।

उन्होंने अपने टैरेस पर बीचो-बीच 250×100 वर्ग फीट का प्लांट बेड तैयार किया है। इसमें कंपोस्ट डालकर वह विभिन्न प्रकार की सब्जियां और विदेशी फल जैसे ड्रैगन फ्रूट, पैशन फ्रूट और चेरी उगाती हैं। यहां पर उन्होंने गन्ने भी उगाये हैं।

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कैसे देती है पौधों को पोषण?

नीला के बगीचे का एक हिस्सा केंचुआ भी है। केंचुए किसानों के दोस्त होते हैं क्योंकि वह पौधों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इनके पोषण के लिए एक पारंपरिक भारतीय नुस्खा अपनाया जाता है, जिसे जीवामृत कहा जाता है। यह गोबर, मूत्र, गुड़ और बेसन को मिलाकर तैयार किया जाता है।

अन्य लोगों को भी करती हैं प्रेरित

नीला और उनके दोस्तों ने मिलकर फेसबुक पर एक ग्रुप की शुरुआत की जिसका नाम उन्होंने “ऑर्गेनिक गार्डन ग्रुप” रखा। इस ग्रुप के माध्यम से एक-दूसरे को खेती के सुझाव और तकनीक साझा करते हैं। इस ग्रुप से लगभग 30,000 सदस्य जुड़े हैं।
नीला के बगीचे की तस्वीरें देखकर कुछ लोग उनके बगीचों को देखने भी आने लगे तथा कुछ लोगों ने उनसे बागवानी पर कुछ टिप्स भी मांगे। ऐसे अनुरोधों को देखकर नीला ने वर्कशॉप चलाने का निर्णय लिया। अब हर रविवार को वह बागवानी पर 2 घंटे की वर्कशॉप चलाती हैं। जहां पर कंपोस्ट ,उर्वरक और प्लांट बेड तैयार करना सिखाया जाता है यह वर्कशॉप बिल्कुल मुफ्त होती है।

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