जाने क्यों हैं यूपी पैरा क्रिकेट टीम के कप्तान ई-रिक्शा चलाने को मजबूर, बचपन में खो दिया था बांया पैर

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यूपी के जिला जालौन के रहने वाले राजा बाबू ने 7-8 साल की उम्र में रेल दुर्घटना में अपना बांया पैर खो दिया था. इस घटना से राजा बाबू के परिवार वाले काफी चिंता में थे कि अब उनकी ऐसी हालत होने के बाद उनके बेटे का अब क्या होगा? मगर राजा बाबू ने हार नहीं मानी और जिंदगी में कुछ नया करने की रेस में निकल पड़े.

उन्हें बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शोक था और उनका यह शोक देखते ही देखते कब जूनून में बदल गया उन्हें पता नहीं चला. उन्होंने मेहनत की और अपने इस सपने को पूरा करने के लिए अख़बार बेचना शुरू किया. इसके बाद उन्होंने 200 रूपए से जूता बनाने का काम भी शुरू किया.

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इतना ही नहीं, राजा बाबू की मेहनत रंग लाई और उन्होंने बोर्ड ऑफ़ डिसेबल्ड क्रिकेट एसोसिएशन से रेस्पक्ट हासिल करते हुए यूपी टीम के कप्तान तक का सफर तय किया. इसी के साथ उनका और उनके परिवार का जीवन पटरी पर आ गया मगर उनकी जिंदगी का संघर्ष ख़त्म नहीं हुआ.

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राजा बाबू ने क्रिकेट खेलकर मान-सम्मान तो बड़ा लिया मगर आर्थिक रूप को मजबूत नहीं कर पाए जिससे उनके परिवार के अच्छे दिन आ पाते क्यूंकि, कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान उनकी मुश्किलें और बड़ गई… आज हालत ऐसे हैं कि उन्हें मजबूरन ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालना पड़ रहा है. उन्हें इस वक़्त सहयोग और सहारे की ज़रुरत है ताकि वह आराम की जिंदगी जी सकें.

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