सोनिया गांधी का असली नाम हैं एंटोनिया एडविजे अल्बिना मेनो, जाने कैसे बनी गांधी परिवार की बड़ी बहू

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राष्ट्र की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की अंतिम अग्रिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के गांधी परिवार की बहू बनने से लेकर राजनीति तक एक मुद्दा हमेशा चर्चाओं में रहा, कि वह विदेशी मूल से है। यह मुद्दा हर राजनीति पड़ाव और चुनाव में जरूर गर्माता है। देश की आजादी के बाद राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व करने वाली सोनिया गांधी पहली विदेशी महिला है। ऐसे में जो भारतीय राजनीति में सबसे पुरानी और सबसे शक्तिशाली पार्टियों में से एक है उसकी कमान एक विदेशी महिला के हाथों में होना… यह हमेशा राजनीतिक गलियारों में बहस का बड़ा मुद्दा रहा है। ऐसे में कौन है सोनिया गांधी? क्या है उनकी असल पहचान ? आइए जानते हैं उनके बारे में सब कुछ विस्तार से…

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इटली में हुआ था सोनिया का जन्म

सोनिया गांधी का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के बेनिटोवा के लुसियाना में हुआ था। सोनिया गांधी का असली नाम एंटोनिया एडविजे अल्बिना मेनो है। उनके पिता का नाम स्टेफानो मेनो और माता का नाम पाओला मैनो है। धार्मिक सर पर सोनिया गांधी रोमन कैथोलिक ईसाई धर्म से ताल्लुक रखती हैं।

बात उनकी नागरिकता की करें तो साल 1946 से लेकर 1983 तक वह इटली नागरिक के तौर पर जानी जाती रही है। 1983 में भारत की नागरिकता हासिल की और तब से अब तक उन्हें भारत की नागरिकता हासिल है।

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इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने आई कैंब्रिज

सोनिया गांधी का बचपन इटली के टूरिन शहर के नजदीक स्थित ऑर्बसानो नामक एक कस्बे में बीता है जहां उनके पिता एक कंस्ट्रक्शन कंपनी का कारोबार चलाते थे। सोनिया का संबंध एक रोमन कैथोलिक परिवार से है और उन्होंने और ऑर्बसानो में ही एक कैथोलिक स्कूल से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई की है। इसके बाद वह अंग्रेजी और इंजीनियरिंग पढ़ाई करने के लिए साल 1964 में कैंब्रिज चली गई थी. जहां उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

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कैंब्रिज में हुई राजीव गांधी से मुलाकात

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही सोनिया गांधी की मुलाकात साल 1965 में राजीव गांधी से हुई। राजीव गांधी और सोनिया गांधी एक ही कॉलेज कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ते थे। पढ़ाई के दौरान ही एक दूसरे से मिले और प्यार करने लगे। सोनिया गांधी तब यह नहीं जानती थी कि राजीव गांधी भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे है हालांकि बाद में उन्हें एक दिन इस बात का पता चला तो वह काफी हैरान हो गई।

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बतौर हाउस वाइफ रहना था पसंद

साल 1968 में सोनिया गांधी और राजीव गांधी ने हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की। शादी के काफी सालों तक सोनिया गांधी बतौर हाउस वाइफ घर संभालती थी। तो वही राजीव गांधी एक पेशेवर पायलट के तौर पर काम करते थे। साल 1982 में राजीव गांधी ने राजनीति का रुख किया इसके बाद सोनिया गांधी भी उनके पीछे-पीछे राजनीति में आ गई।

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1991 में हुआ राजीव गांधा का निधन

शुरुआत में सोनिया गांधी राजीव गांधी के साथ उनके राजनीतिक चुनावी रैलियों के चुनाव प्रचार में हिस्सा लेती थी। इसके बाद साल 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी को पार्टी में शामिल होने और प्रधानमंत्री पद का पदभार संभालने के लिए कांग्रेस पार्टी में आमंत्रित किया गया, जिसे उन्होंने मना कर दिया। इसके बाद पार्टी ने पी वी नरसिम्हा राव को अपना नेता बनाया और वह भारत के प्रधानमंत्री चुने गए।

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1998 में हुई सक्रिय

एक बार साल 1996 में कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद पार्टी में धीरे-धीरे मनमुटाव बढ़ने लगा। पार्टी को टूटता देख साल 1997 में कोलकाता में पार्टी का पूर्ण अधिवेशन बुलाया गया और उसमें सोनिया गांधी को भी पार्टी में शामिल होने के लिए कहा गया। इसी अधिवेशन से सोनिया गांधी एक बार फिर राजनीति में सक्रिय हुई और साल 1998 में पार्टी की अध्यक्ष बनी। तब से अब तक सोनिया गांधी का राजनीतिक सफर जारी।

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