₹2 लाख से शुरू किया था कपड़े प्रेस करने का कारोबार, अब हर महीने कमा रहीं ₹4 लाख रुपये

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ऐसे कई लोग है जो आस पास लोगो की परेशानियों को देखर उनसे प्रेरित होकर उनकी मदद करने के लिए बिज़नेस बना लेतेहै उनमे से एक है  संध्या नांबियार , हम और आप की तरह एक आम ज़िन्दगी जीती थी पर उन्होंने आम लोगो की परेशानियों से छुटकारा दिलाने के लिए 2017 में इस्तरीपेटी की नींव रखी आपको बता दे की संध्या कपड़ों को ग्राहकों के मुताबिक बड़े ही सावधानी से धोया जाता है।

तमिल में इस्तरी पेटी का मतलब एक लोहे का प्रेस होता है आपको बता दे की इस समय कोयला भरकर गर्म करके कपड़ों पर इस्तरी की जाती है और संध्या की इस्तरीपेटी एक प्रोफेशनल आयरनिंग और लॉन्ड्रिंग बिजनेस है उनका बिज़नेस बी2बी यानी के बिजनेस टू बिजनेस और बी2सी बिजनेस टू कंज्यूमर है।

अपने बिज़नेस के बारे में संध्या कहती है “हम अपने सभी ग्राहकों को सुगंधित इस्तरी किए हुए कड़क और करीने से सजे कपड़े देना चाहते हैं, ताकि उनसे बिल्कुल नए कपड़ों जैसी महक आए। भारत में लॉन्ड्री बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र है। हम इस्तरीपेटी के साथ इस काम को आसान बनाना चाहते हैं, जिससे ग्राहक की खुशी और संतुष्टि मिले”

बता दे की इस्तरीपेटी चेन्नई में है उनकी कंपनी कपड़ों को घर, ऑफिस या ग्राहकों की सुविधा के हिसाब से कहीं भी लाता है उन्हें धोने के बाद उन्हें उनकी बताई जगह पर डिलीवर कर देता है यानी केलोगो को रोजाना अपने धोबी से कपड़ों के धब्बे, बदबू, नकद लेन-देन या समय को लेकर बहस नहीं करनी पड़ेगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2019 में लॉन्ड्री केयर सेगमेंट का कारोबार तकरीबन 3.96 अरब डॉलर का और ऐसा माना जा रहा है की साल 2023 तक सालाना 3.7 प्रतिशत बढ़न सकता है इस समय संध्या की इस्तरीपेटी लॉन्ड्री मार्केट में पिकमायलॉन्ड्री, अर्बन धोबी, टूलर जैसे स्टार्टअप के साथ मुकाबला कर रही है अभी के लिए उनका कहना है की इस्तरीपेटी की सर्विस की क्वॉलिटी, डिलीवरी टाइम और डिस्काउंट इसे दूसर स्टार्टअप से अलग करते हैं।

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